आर्काइव | कोरोना की दूसरी लहर में उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचा चरमरा गया. लेकिन आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि जो लोग ‘‘अफवाहें’’ फैला रहे हैं और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के जरिए ‘‘वातावरण खराब कर रहे हैं’’ उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्ति भी जब्त की जाए. 2021 के शुरूआती महीनों में स्वास्थ्य के मामले में कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर वाला उत्तर प्रदेश किसी भी हालत में कोविड-19 की दूसरी लहर से निपटने के लिए तैयार नहीं था. समूचे राज्य में ऑक्सीजन, वेंटीलेटर्स और आईसीयू में बिस्तर की गंभीर कमी थी. इस लहर का आना तय माना जा रहा था लेकिन महामारी के इस आसन्न संकट से निबटने के लिए राज्य को तैयार करने की बजाय आदित्यनाथ का पूरा ध्यान मुख्य रूप से अप्रैल में होने वाले पंचायत चुनाव पर टिका था. सामान्यतः राजनीतिक पार्टियों की प्राथमिकता सूची में पंचायत चुनाव का कुछ खास स्थान नहीं होता. लेकिन यह चुनाव 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले के एक वर्ष से भी कम समय में होने जा रहा था इसलिए इसका प्रबंधन करना जरूरी लगा. जिस तरह आदित्यनाथ ने पंचायत चुनाव के नतीजों को बीजेपी के पक्ष में करने का प्रयास किया उससे यह बात स्पष्ट हो जाती है.
इन्हीं कारणों से विपक्षी पार्टियां भी पूरी ताकत के साथ इसमें लग गईं. चुनाव प्रचार के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का तनिक भी ध्यान नहीं दिया गया. अभी यह अभियान अपने चरम पर था कि तभी अप्रैल के दूसरे हफ्ते में उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई और अप्रैल के अंत तक हालात बेकाबू होने लगे.
आदित्यनाथ ने दूसरी लहर से निबटने में जो ढिलाई दिखाई उससे न केवल वास्तविकता पर उनकी कमजोर पकड़ का पता चलता है बल्कि यह भी आभास मिलता है कि सच्चाई से उनकी सरकार का किस तरह का बैर था. मरीजों के बढ़ने और अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडरों के न होने की खबरें जब सुर्खियां बनने लगीं तो उनके कार्यालय ने ट्वीट किया कि राज्य में ऑक्सीजन या वेंटीलेटर और बेड की कोई कमी नहीं है. उन्होंने अपने अधिकारियों से कहा कि जो लोग ‘‘अफवाहें’’ फैला रहे हैं और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के जरिए ‘‘वातावरण खराब कर रहे हैं’’ उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्ति भी जब्त की जाए.
उनकी धमकियों और तथ्यों को झुठलाने का कोई असर नहीं पड़ा. जब गंगा में तैरते शवों को लोगों ने देखा तो उनकी ये धमकियां एक क्रूर मजाक बनकर रह गयीं. आदित्यनाथ का यह व्यवहार पूरी तरह सभ्य राजनीतिक तौरतरीकों के विपरीत था और इससे उत्तर प्रदेश में जो कुछ हो रहा था उसकी एक दर्दनाक तस्वीर उभरकर आयी.
दैनिक भास्कर के संपादक ओम गौड़ ने न्यूयार्क टाइम्स में एक मार्मिक टिप्पणी लिखी- ‘‘अगर मौसम ने जाहिर नहीं किया होता तो शायद हम इस हादसे को कभी जान नहीं पाते. मई के शुरूआती दिनों में बारिश की वजह से गंगा का पानी बढ़ गया जिससे लाशें नदी की सतह पर आ गयीं और तटों तक बिखर गयीं. पानी की वजह से घाट की रेत खिसक गई और वहां दफनाई गई लाशें नजर आने लगीं. इस बारिश ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने या टीके की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने या इन सारी खामियों की जिम्मेदारी लेने में सरकार की जबर्दस्त विफलता को तार-तार कर दिया.’’
8 नवंबर को रामपुर की एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कोविड-19 संकट के समय अपनी सरकार के प्रबंधन के लिए खुद को बधाई दी और कहा कि यह ‘‘दुनिया में सर्वोत्तम” था.