भारत के विभिन्न स्थानों पर स्थापित सम्राट अशोक के स्तंभ



भारत के विभिन्न स्थानों पर स्थापित सम्राट अशोक के स्तंभों (Ashokan Pillars) और उनके शीर्ष पर बनी हुई शिलाओं (capitals) को दर्शाता है। इन स्तंभों को मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में बनवाया था। इन स्तंभों के शीर्ष पर अलग-अलग जानवरों की मूर्तियाँ बनाई गई थीं, जो बौद्ध धर्म के प्रतीकों को दर्शाती हैं।
प्रमुख स्थान और शिलाएं:
सारणाथ (Sarnath)- चार शेरों की मूर्ति (Lion Capital) — यह सबसे प्रसिद्ध है और भारत का राष्ट्रीय प्रतीक भी है। यह स्तंभ बौद्ध धर्म के "धर्मचक्र प्रवर्तन" की याद में बनाया गया था।
सांची (Sanchi) - यहाँ का स्तंभ शेर के आकार में है। यह बौद्ध धर्म के प्रचार से जुड़ा है।
सांकीसा (Sankissa)- यहाँ हाथी की आकृति वाला स्तंभ है। यह बुद्ध के पृथ्वी पर आगमन का प्रतीक है।
लौरिया नंदनगढ़ (Lauria Nandangarh)- यहाँ भी शेर की आकृति वाला स्तंभ है।
रामपुरवा (Rampurva)- यहाँ बैल (Bull) और ऊँट के समान दिखने वाले जानवर की आकृतियाँ मिली हैं। यह स्तंभ नेपाल और बिहार की सीमा के पास स्थित है।
वैशाली (Vaishali)- यहाँ एक शेर की मूर्ति है।
दक्षिण भारत (शायद अमरावती या अन्य क्षेत्र)- यहाँ भी शेर की आकृति वाला स्तंभ है, जो बौद्ध धर्म के दक्षिण भारत में फैलाव का संकेत है।
विशेषताएँ:-
सभी मूर्तियाँ एक ही पत्थर से बनाई गई थीं और उच्च गुणवत्ता वाली पॉलिश की गई थीं। ये स्तंभ बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों और सम्राट अशोक के धम्म (धर्म) को फैलाने के लिए बनाए गए थे।
इन पर ब्राह्मी लिपि में लेख भी पाए जाते हैं।



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